जनता की शिकायतें बेअसर, नियमों की खुलेआम अनदेखी! नए बस स्टैंड पर शराब दुकान को लेकर प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

पुरानी टेहरी के नाम की दुकान बस स्टैंड पर, डुमराऊ में ग्रामीण क्षेत्र की दुकान का संचालन; 4 किमी में 5 दुकानें, खुले मैदान में छलक रहे जाम

टीकमगढ़। शहर में शराब दुकानों के संचालन को लेकर नियमों की अनदेखी के आरोप अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। नए बस स्टैंड और डुमराऊ क्षेत्र में संचालित शराब दुकानों को लेकर स्थानीय पार्षदों और रहवासियों ने पहले भी ज्ञापन और शिकायतें देकर अपनी परेशानी प्रशासन के सामने रखी थी, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नए बस स्टैंड के सामने संचालित शराब दुकान पुरानी टेहरी के नाम से स्वीकृत है, जबकि दुकान का संचालन शहर के बेहद व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्र में किया जा रहा है। वहीं डुमराऊ में संचालित दुकान आनंतपुरा ग्रामीण क्षेत्र के नाम से स्वीकृत होने के बावजूद शहरी सीमा में संचालित किए जाने का आरोप है। इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर जांच होना जरूरी है।

चार किलोमीटर में पांच दुकानें, व्यवस्था पर सवाल

रहवासियों के अनुसार शहर के महज करीब चार किलोमीटर के दायरे में पांच शराब दुकानें संचालित हो रही हैं। खासतौर पर रिहायशी और सार्वजनिक क्षेत्रों के आसपास दुकानों के संचालन से महिलाओं, बच्चों, यात्रियों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नए बस स्टैंड क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब दुकान के आसपास खुले मैदान में दिनभर शराबियों का जमावड़ा रहता है और खुलेआम जाम छलकते हैं। इससे बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों, महिलाओं और आम राहगीरों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। लोगों ने विवाद और छींटाकशी जैसी घटनाओं की भी शिकायत की है।

ज्ञापन दिया, शिकायत की, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्थानीय पार्षद और रहवासी प्रशासन को लिखित शिकायत और ज्ञापन देकर समस्या से अवगत करा चुके हैं, तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर जनता की शिकायतें अधिकारियों की फाइलों में दबकर क्यों रह जाती हैं?

एक तरफ शहर की जनता खराब सड़कों और गड्ढों की समस्या से जूझ रही है, दूसरी तरफ सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों पर शराब दुकानों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों में नाराजगी स्वाभाविक है।

‘जनता के साथ विश्वास’ का दावा, फिर जनता की आवाज क्यों नहीं सुन रही व्यवस्था?

प्रशासन की ओर से लगातार जनता के साथ बेहतर समन्वय और विश्वास कायम करने की बात कही जाती है, लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब जनता खुद आगे आकर अपनी समस्या बता रही है और ज्ञापन दे रही है, तो उसकी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती?

लोगों ने मांग की है कि आबकारी विभाग और प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करें कि संबंधित शराब दुकानों को किस स्थान के लिए स्वीकृति मिली है और वर्तमान में उनका संचालन नियमानुसार हो रहा है या नहीं। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन और असामाजिक तत्वों के जमावड़े पर पुलिस को प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

अब देखना यह है कि जनता की शिकायतों के बाद प्रशासन नियमों की जांच कर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी शिकायतों और ज्ञापनों के बीच ही दबकर रह जाता है।