इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से औद्योगिक और तकनीकी विकास की नई पहचान स्थापित कर रहा है। प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने और मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख तकनीकी केंद्रों में शामिल करने की दिशा में आयोजित मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 ने नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस दो दिवसीय समिट के माध्यम से लगभग 5,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 10 हजार से अधिक रोजगार के अवसर प्रस्तावित हैं।
समिट में एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों तथा जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्वीडन के प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल निवेश प्रस्ताव जुटाना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को गति देना है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को नई दिशा देंगी मुख्यमंत्री की घोषणाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के लिए सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा फोटोनिक्स एवं क्वांटम टेक्नोलॉजीज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों के माध्यम से चिप डिजाइन, वीएलएसआई, अनुसंधान एवं विकास, प्रोटोटाइपिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।
इंदौर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग और चिप डिजाइन जैसे हाईटेक उद्योगों को प्राथमिकता देने का निर्णय भी प्रदेश के औद्योगिक भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे क्षेत्र में आधुनिक विनिर्माण इकाइयों, तकनीकी संस्थानों और रोजगार आधारित आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं मजबूत होंगी।
मुख्यमंत्री की इन पहलों से यह संदेश स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पारंपरिक औद्योगिक विकास के साथ भविष्य की तकनीकों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है।
9,625 करोड़ के निवेश वाली परियोजनाओं को भी मिला प्रोत्साहन
समिट के दौरान पांच कंपनियों को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन के आशय पत्र प्रदान किए गए। इन परियोजनाओं में लगभग 9,625 करोड़ रुपये का निवेश और 4,450 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रस्तावित हैं। इनमें ग्वालियर के गंगा मालनपुर में 6,415 करोड़ रुपये की लागत से 50 मेगावाट क्षमता का हाइपरस्केल डेटा सेंटर, भोपाल में 2,000 करोड़ रुपये की लिथियम सेल विनिर्माण इकाई तथा इंदौर में ग्लोबल कैपेबलिटी सेंटर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, इंदौर के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स में सात कंपनियों को कार्यालयीन स्थान के आशय पत्र दिए गए। इन इकाइयों के माध्यम से 1,280 से अधिक रोजगार के अवसर प्रस्तावित हैं। सेमीकंडक्टर डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और जनरेटिव एआई आधारित गतिविधियों को इससे बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों के भरोसे की वजह बन रहीं सरल नीतियां
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने ढाई वर्ष में 25 से अधिक नीतियां बनाकर निवेश और औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सहित विभिन्न प्रयासों से प्रदेश को लगभग 34 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं।
सरकार की प्राथमिकता निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने, त्वरित स्वीकृति देने और उद्योगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने की है। निवेशकों को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, त्वरित अनुमतियों और 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया गया है।
मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण प्रदेश में निवेशक-अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने उद्योग जगत से मध्यप्रदेश के साथ दीर्घकालिक साझेदारी करने और आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सहभागिता का आह्वान किया।
कौशल विकास और वैश्विक सहयोग पर विशेष जोर
समिट में पांच प्रमुख संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया, सेमी इंडिया, सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी मोहाली, इंटरनेशनल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री ग्रुप और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। इन समझौतों से कौशल विकास, चिप डिजाइन, उद्योग आधारित प्रशिक्षण, अनुसंधान, निवेश प्रोत्साहन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
एमपी सेमीकॉन स्टार्टअप चैलेंज के माध्यम से भी नवाचार को प्रोत्साहित किया गया। चयनित स्टार्टअप्स की प्रस्तुतियों के बाद चुने गए विजेताओं को कुल छह लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। इससे प्रदेश के युवाओं और उभरते उद्यमियों को सेमीकंडक्टर एवं डीप-टेक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में मजबूत कदम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को केवल आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। कोविड काल में चिप की कमी से प्रभावित वैश्विक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समिट में 57 प्रदर्शकों ने 70 बूथ और तीन बड़े स्टॉल के माध्यम से अपनी तकनीकों, उत्पादों और अनुसंधान कार्यों का प्रदर्शन किया। आठ पैनल चर्चाओं, पांच राउंडटेबल और छह की-नोट उद्बोधनों ने उद्योग, सरकार, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच संवाद को व्यापक मंच प्रदान किया।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश को आधुनिक तकनीक, निवेश और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। निवेश प्रस्तावों, नई संस्थागत घोषणाओं, वैश्विक सहभागिता और कौशल विकास पर केंद्रित प्रयासों से मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। सरकार और उद्योग जगत के समन्वित प्रयास सफल होते हैं, तो प्रदेश आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर और हाईटेक विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकता है।
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