*भोपाल नायर समाज ने धूमधाम से मनाया ओणम उत्सव*
*सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और ओणसद्या रहे आकर्षण का केंद्र*
*ओणम उत्सव में प्रो. अमिताभ सक्सेना बोले भाषा और संस्कृति से ही सुरक्षित रहती है पहचान*
*ओणम दुनिया भर में बसे मलयालियों को एकता के सूत्र में पिरोता है: ए.जी. वल्लभन*
भोपाल नायर समाज द्वारा खजुरीकलां स्थित मन्नम भवन में ओणम का त्यौहार पारंपरिक उत्साह, हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। प्रातः 10 बजे दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रार्थना के साथ शुरू हुए इस समारोह ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कार्यकारी निदेशक प्रो. अमिताभ सक्सेना ने अपने संबोधन में भाषा और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भाषा पीढ़ियों को आपस में जोड़ने वाली मजबूत कड़ी है। यदि यह कड़ी कमजोर पड़ती है, तो देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों की निरंतरता पर विपरीत असर पड़ता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भोपाल नायर समाज के अध्यक्ष ए.जी. वल्लभन ने कहा कि ओणम दुनिया भर में बसे मलयालियों को एकता के सूत्र में पिरोता है। यह पर्व समावेशिता, अपनत्व और सहभागिता का संदेश देता है, जहाँ हर घर अतिथियों के स्वागत के लिए तत्पर रहता है।
*मुख्य आकर्षण पारंपरिक महाभोज 'ओणसद्या' रहा*
समारोह के दौरान केरल के पौराणिक राजा महाबली के शासनकाल को याद किया गया, जो करुणा, समानता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और ओणसद्या आकर्षण का केंद्र रहे।कार्यक्रम में मनमोहक तिरुवातिराकली नृत्य, समूह नृत्य और पारंपरिक गीतों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने केरल की जीवंत संस्कृति की झलक पेश की। आयोजन का मुख्य आकर्षण पारंपरिक महाभोज 'ओणसद्या' रहा, जिसमें उपस्थित अतिथियों एवं समाज के सदस्यों ने केरल के प्रामाणिक व्यंजनों का आनंद लिया।इस अवसर पर नायर समाज के सदस्यों, उनके परिवारों और आमंत्रित अतिथियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर उत्सव की आत्मीयता को बढ़ाया।
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